दोस्तों, आज हम बात करने वाले हैं संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान provision for doubtful debts के बारे में।
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन का मतलब provision for doubtful debts meaning in hindi
- जैसा कि आप जानते हैं कि आजकल बिजनेस में उधार यानि क्रेडिट का चलन है।
- हर किसी बिजनेस में उधार पर काम करना ही पड़ता है।
- जब हम उधार माल बेचते हैं तो कई बार हमारे पैसे भी डूब जाते हैं।
- जिन्हें हमने माल उधार बेचा है वो पैसा नहीं दे पाता, जिसे हम डूबत ऋण कहते हैं।
- कई देनदार ऐसे होते हैं जिनसे पैसा वसूल हो भी सकता है और नहीं भी, उन्हें संदिग्ध ऋण कहा जाता है।
- वित्तीय वर्ष के अंत में हम लाभ में से एक निश्चित राशि संदिग्ध ऋणों के लिए निकाल कर रखते हैं।
- इस राशि को ही संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन provision for doubtful debts कहा जाता है।
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन क्या हैं what is provision for doubtful debts
वित्तीय वर्ष के अंत में लाभ का कुछ हिस्सा ऐसे देनदारों के लिए रखा जाता है जिनसे पैसे डूबने की आशंका होती है, लाभ के इस हिस्से को संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन provision for doubtful debts कहा जाता है।
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन क्यों जरूरी है why is provision for doubtful debts created
व्यापार को भविष्य में होने वाली हानि से बचाने के लिए संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन provision for doubtful debts जरूरी है।
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन difference between provision for bad debts and provision for doubtful debts
वित्तीय वर्ष के अंत में लाभ का कुछ हिस्सा ऐसे देनदारों के लिए रखा जाता है जिनसे पैसे डूब जाते हैं है, लाभ के इस हिस्से को डूबत ऋणों के लिए आयोजन difference between provision for bad debts कहा जाता है।
और
वित्तीय वर्ष के अंत में लाभ का कुछ हिस्सा ऐसे देनदारों के लिए रखा जाता है जिनसे पैसे डूबने की आशंका होती है, लाभ के इस हिस्से को संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन provision for doubtful debts कहा जाता है।
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन की प्रविष्टि provision for doubtful debts journal entry
वित्तीय वर्ष के अंत में प्रविष्टि
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन ₹9000
| खाता | खाते का प्रकार | खाते का नियम | Dr./Cr. |
| Provision for Doubtful Debts | Liabilities | दायित्व बढता है तो क्रेडिट और दायित्व कम होता है तो डेबिट | Cr |
| Profit and Loss Account | Nominal Account | खर्चे व हानि को डेबिट और आय व लाभ को क्रेडिट | Dr |
प्रविष्टि Journal Entry
| Profit and Loss Account Dr | 9,000 | ||
| To Provision for Doubtful Debts | 9,000 | ||
| (Provision for Doubtful Debts made) |
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन बढाने पर प्रविष्टि increase in provision for doubtful debts
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन बढाया ₹5000
| खाता | खाते का प्रकार | खाते का नियम | Dr./Cr. |
| Provision for Doubtful Debts | Liabilities | दायित्व बढता है तो क्रेडिट और दायित्व कम होता है तो डेबिट | Cr |
| Profit and Loss Account | Nominal Account | खर्चे व हानि को डेबिट और आय व लाभ को क्रेडिट | Dr |
प्रविष्टि Journal Entry
| Profit and Loss Account Dr | 5,000 | ||
| To Provision for Doubtful Debts | 5,000 | ||
| (Provision for Doubtful Debts Increase) |
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन घटाने पर प्रविष्टि decrease in provision for doubtful debts
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन घटाया ₹3000
| खाता | खाते का प्रकार | खाते का नियम | Dr./Cr. |
| Provision for Doubtful Debts | Liabilities | दायित्व बढता है तो क्रेडिट और दायित्व कम होता है तो डेबिट | Dr |
| Profit and Loss Account | Nominal Account | खर्चे व हानि को डेबिट और आय व लाभ को क्रेडिट | Cr |
प्रविष्टि Journal Entry
| Provision for Doubtful Debts Dr | 3,000 | ||
| To Profit and Loss Account | 3,000 | ||
| (Provision for Doubtful Debts Decrease) |
संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान अब आवश्यक नहीं है provision for doubtful debts is no longer necessary
संदिग्ध ऋणों के लिए आयोजन ₹ 6000
| खाता | खाते का प्रकार | खाते का नियम | Dr./Cr. |
| Provision for Doubtful Debts | Liabilities | दायित्व बढता है तो क्रेडिट और दायित्व कम होता है तो डेबिट | Dr |
| Profit and Loss Account | Nominal Account | खर्चे व हानि को डेबिट और आय व लाभ को क्रेडिट | Cr |
प्रविष्टि Journal Entry
| Provision for Doubtful Debts Dr | 6,000 | ||
| To Profit and Loss Account | 6,000 | ||
| (Provision for Doubtful Debts Decrease) |
संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान की गणना कैसे करें how to calculate provision for doubtful debts
- वित्तीय वर्ष के अंत में लाभ में से कुछ हिस्सा संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान के लिए रखा जाता है।
- संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान की गणना देनदारों के एक निश्चित प्रतिशत पर की जाती थी।