Ledger and Group in Tally Prime | टेली प्राइम में लेजर और ग्रुप क्या है

दोस्तों, आज के ब्लाॅग में हम लेजर और उसके ग्रुप Ledger and Group के बारे में बात करेंगे:-

  • जब हम हाथों से खाते लिखते थे जब उधारी के लिए अलग-अलग आदमी के लिए अलग-अलग खाता बनाते थे।
  • साथ ही खरीद और बिक्री के लिए भी अलग खाता बही रखते थे। 
  • अलग-अलग प्रकार के खर्चों के लिए अलग-अलग हिसाब रखते थे।
  • इन्हें टेली की भाषा में Ledger (खाता) कहा जाता है।

लेजर से हम कई बातें आसानी से पता कर सकते हैं जैसे :-

  • जिनसे हमने उधार माल खरीदा है /उस लेनदार को उसे कितना भुगतान करना होगा?
  • किस खरीददार/ग्राहक से कितना प्राप्त करना है?
  • किसी विशेष अवधि के दौरान खरीदी और बिक्री की कुल राशि कितनी है?
  • वेतन, किराया, गाड़ी, स्टेशनरी आदि जैसे विभिन्न मदों पर कितना नकद खर्च किया गया है?

TALLY में groups क्या है types of groups?

Tally में लेजर को अलग-अलग समुह में रखा जाता है जिसे ग्रुप Group कहते हैं।

Tally Prime में ग्रुप Group 32 प्रकार के होते हैं। टेली प्राइम के ग्रुप के बारे मे हम आगे डिटेल में बात करेंगे।

Ledger Group kya hai

  • लेजर को अलग-अलग छांटने के लिए उन्हें अलग-अलग बांटकर रखा जाता है। 
  • हम व्यवसाय में उधार माल खरीदकर लाते हैं। 
  • जैसेः- इसरार से 2000 रूपये का माल खरीदा। 
  • जावेद से 1000 रूपये का माल खरीदा। 
  • सुरेश से 5000 का माल खरीदा। 
  • ये सभी हमारे Creditors हुए इसलिए इन्हें हम Sundry Creditors ग्रुप में डाल देते हैं।  
  • व्यवसाय में उधार माल बेचते भी हैं। 
  • जैसेः- दिलदार को 3000 रूपये का माल बेचा।  
  • जावेद को 7000 रूपये का माल बेचा। 
  • तौफीक को 1000 का माल खरीदा। 
  • ये सभी हमारे Debtors  हुए इसलिए इन्हें हम  Sundry Debtors ग्रुप में डाल देते हैं। 
  • व्यवसाय में अलग-अलग प्रकार के खर्चे करते हैं। 
  • जैसे:- जब भी माल हम खरीदकर अपने गोदाम तक लाते हैं हमे आवक गाड़ी भाड़ा चुकाना होता है। 
  • ये खर्चे वित्त वर्ष मे कई बार होते हैं इसलिए इन्हें एक ग्रुप मे डाल देते हैं चूंकि इसका असर सीधे माल की लागत पर पड़ता है इसलिए इन्हें एक ग्रुप में डाल देते हैं। 
  • इन खर्चों के अलावा आॅफिस के खर्चे, स्टाॅफ के खर्चे, बिजली और पानी के खर्चे आदि भी होते हैं ये खर्चे लागत पर सीधे तौर पर असर नहीं करते इसलिए इन्हे हम अलग ग्रुप मेें डाल देते हैं। 
  • इसी तरह और भी कई खाते ऐसे हैं जिन्हें हम अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग ग्रुप में बांट सकते हैं। 
  • इन सबको अलग-अगल प्रकार के समूह में बांटते हैं। 
  • जिन्हें टेली की भाषा मे Group कहा जाता है। 

Group से हम कई बातें आसानी से पता कर सकते हैं जैसे :-

  • जिनसे हमने उधार माल खरीदा है / लेनदारों को कुल कितना भुगतान करना होगा?
  • खरीददारों / देनदारों / ग्राहकों से कितना प्राप्त करना है?
  • किसी अवधि के दौरान खरीद और बिक्री की कुल राशि कितनी है?
  • वेतन, किराया, गाड़ी, स्टेशनरी आदि जैसे विभिन्न मदों पर कितना नकद खर्च किया गया है?
  • किसी विशेष अवधि के दौरान किए गए लाभ या हानि की राशि क्या है?
  • किसी विशेष तिथि पर इकाई की वित्तीय स्थिति क्या है?
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